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Tuesday, 12 December 2017

ख्वाब

आज मैने अपने आप को शीशे मे देखा
कुछ नया नहि था
रोज देखती हु
मगर आज कुछ अलग दिखा
थोडा सा गुस्सा थोडा सा गुरुर
बहोत सारे समजोते बहोत सारे ख्वाब
मगर आज मुजसे अपने आप से नजर नही मीली
एसा क्या हो गया मुजसे
थोडा सोचने के बाद पता चला
आज फिर एक समजोता हुआ था ख्वाब के आगे
एक बार फिर ख्वाब पीछे रेह गया
एक बार फिर कुछ छुट गया.